सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सड़क की धूल को नियंत्रित करने से लेकर वायु गुणवत्ता की रियल टाइम निगरानी, निर्माण एवं विध्वंस कचरे के प्रबंधन और ट्रैफिक जाम कम करने के लिए विभागवार लक्ष्य तय किए गए हैं।
मंगलवार को निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में आगामी ग्रेप अवधि से पहले सभी जरूरी संसाधन और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
आठ मॉनीटरिंग स्टेशन करने का लक्ष्य
सड़क से उड़ने वाली धूल को प्रदूषण का बड़ा स्रोत मानते हुए निगम ने 404.61 किलोमीटर सड़क नेटवर्क को मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए उपयुक्त पाया है। निगम के पास फिलहाल 24 मशीनें हैं। इनसे प्रतिदिन 600 किलोमीटर से अधिक चार लेन सड़क की सफाई का प्रविधान है।
मशीनों का संचालन मुख्य रूप से रात नौ बजे से सुबह सात बजे तक किया जाता है। शहर में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए मौजूदा तीन एयर क्वालिटी मानिटरिंग स्टेशन को बढ़ाकर आठ करने का लक्ष्य है।
पांच नए स्टेशनों के लिए गैप चिह्नित किया गया है और दिसंबर 2026 तक इन्हें स्थापित करने की समयसीमा रखी गई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति का डेटा जुटाने और उसके आधार पर नियंत्रण उपाय लागू करने में मदद मिलेगी।
सीएंडडी कचरे के निस्तारण पर नजर
निर्माण एवं विध्वंस कचरे के लिए शहर में 1500 टन प्रतिदिन की प्रोसेसिंग क्षमता उपलब्ध है। 12 सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट को सीएंडडी वेस्ट पोर्टल पर लाइव किया जा चुका है।
इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक 3.38 लाख टन से अधिक सीएंडडी कचरे का ऑफटेक किया गया। निगरानी के लिए वेब कैमरे लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
396 किमी सड़क सुधार का लक्ष्य
वर्ष 2026 में 396 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा गया है। निगम के अनुसार अब तक 179.04 किलोमीटर सड़क का पुनर्विकास पूरा हो चुका है। इसके अलावा 31 ट्रैफिक कंजेशन हाटस्पाट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें चार स्थानों पर काम पूरा हो चुका है।
