पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती विज्ञापन में बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के तहत साक्षात्कार के लिए न्यूनतम उत्तीर्ण अंक निर्धारित नहीं किए गए हैं, तो चयन समिति केवल साक्षात्कार के आधार पर किसी उम्मीदवार को ‘योग्य नहीं पाया गया’ घोषित नहीं कर सकती।
चयन समिति को विज्ञापन में निर्धारित सभी मानकों और उनके लिए तय अंकों के आधार पर उम्मीदवार की योग्यता का आकलन करना होगा।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी में सहायक पद की भर्ती से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चयन के दौरान ऐसा अयोग्यता मानदंड लागू करना, जो भर्ती विज्ञापन में था ही नहीं, अधिकार क्षेत्र से परे जाकर चयन प्रक्रिया के नियमों को बदलने के समान है।
