सुखना वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल का दर्जा मिलने से चंडीगढ़ की प्राकृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिली है. इस उपलब्धि पर चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने खुशी जताते हुए शहरवासियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और संरक्षण कार्यों से जुड़े लोगों को बधाई दी.
संरक्षण के प्रयासों को मिलेगी मजबूती: प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि, “यह उपलब्धि वेटलैंड के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण है. रामसर सूची में शामिल होने से सुखना वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और जैव विविधता की सुरक्षा के प्रयासों को मजबूती मिलेगी.”
प्रवासी पक्षियों के लिए अहम ठिकाना: सुखना वेटलैंड स्थानीय जलीय पक्षियों के साथ मध्य एशियाई उड़ान मार्ग से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है. यहां खुले पानी, तटीय वनस्पतियों, झाड़ियों और जंगलों का मिश्रण पक्षियों को भोजन, प्रजनन और सर्दियों में ठहरने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराता है.
दुर्लभ प्रजातियों को मिलता है संरक्षण: इस आर्द्रभूमि में संकटग्रस्त कॉमन पोचार्ड और लुप्तप्राय पल्लास फिश ईगल जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं. इसके उथले तटीय क्षेत्र संकटग्रस्त ब्लैक पॉन्ड टर्टल के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में वेटलैंड का संरक्षण कई दुर्लभ जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है.
वैज्ञानिक सहयोग और पर्यटन की संभावनाएं: प्रशासन के अनुसार रामसर स्थल का दर्जा मिलने से वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग, तकनीकी सहायता और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा मिल सकता है. साथ ही, प्रकृति आधारित पर्यटन यानी इको-टूरिज्म की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं. इससे लोगों में आर्द्रभूमि और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
जल-ग्रहण क्षेत्र का संरक्षण भी जरूरी: इस उपलब्धि के साथ सुखना वेटलैंड, उसके जल-ग्रहण क्षेत्र और आसपास के सुखना वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो गई है. दीर्घकालिक संरक्षण, बेहतर पर्यावरण प्रबंधन और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के प्रयास इस अंतरराष्ट्रीय पहचान को सार्थक बनाने में अहम होंगे.
