भारत सरकार ने छोटी बचत के लिए सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसे 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत शुरू किया गया था. लेकिन हैरानी वाली बात है कि प्रदेश के लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं.
पिछले 10 साल में खाता खुलवाने में नहीं दिखी अधिक दिलचस्पी: हरियाणा के डाकघर की सभी डिवीजन के रिकॉर्ड पर गौर करें तो दस वर्ष बाद भी इस योजना के तहत बच्चियों के खाते खुलवाने में लोगों ने अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई है. प्रदेश में जिलावार बच्चियों की संख्या की तुलना में डाकघरों में सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खुलवाए गए खाते कुछ सवाल जरूर खड़े करते हैं. क्योंकि मिलेनियम सिटी गुरुग्राम समेत केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के शहर करनाल में भी एसएसवाई योजना के ओपन खाते पचास प्रतिशत भी नहीं हैं.
इस संबंध में ईटीवी भारत ने हरियाणा डाकघर के (एडी एंड एफएस) बिजनेस हेड प्रदीप बजाज से बातचीत की. बातचीत के दौरान प्रदीप बजाज ने बताया कि, “योजना संबंधी जागरूकता के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रयास किए जा रहे हैं. प्रदेश के कुछ जिलों में आंकड़ा संतोषजनक नहीं होने के कारण लोगों से संपर्क बढ़ाते हुए उन्हें जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं. कुछ जिलों में लोग योजना का लाभ लेने के लिए आगे जरूर आए हैं.”
दस जिलों में पचास प्रतिशत एसएसवाई खाते: प्रदीप बजाज ने बताया कि, “डाकघर की अंबाला, भिवानी, कुरूक्षेत्र और रोहतक डिवीजन के अंतर्गत अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, भिवानी, चरखी-दादरी, महेंद्रगढ़, कुरूक्षेत्र, कैथल, रोहतक और झज्जर में ही अधिक लोगों ने अपनी 0 से 10 वर्ष तक की बच्चियों के सुकन्या समृद्धि योजना के खाते खुलवाए हैं. जबकि डाकघर की प्रदेश में कुल 22 डिवीजन हैं, जिनके अंतर्गत जिलों में इस योजना के तहत खाते खुलवाकर केंद्र सरकार से लाभ हासिल करने में उदासीनता देखी गई है.”
गुरुग्राम डिवीजन में सबसे कम एसएसवाई खाते: वहीं, प्रदेश भर में डाकघर की सभी डिवीजन के रिकॉर्ड पर गौर किया तो पाया कि समूचे प्रदेश में सबसे कम सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) के खाते गुरुग्राम डिवीजन में हैं. यहां प्रति 100 पात्र लड़कियों पर केवल 26.8 प्रतिशत खाते ही खुलवाए गए हैं. गुरुग्राम डिवीजन के अंतर्गत मिलेनियम सिटी गुरुग्राम समेत नूहं और रेवाड़ी शामिल हैं और इन तीनों जगहों पर एकसमान आंकड़ा है. फरीदाबाद डिवीजन भी हू-ब-हू इसी ढर्रे पर है. इस डिवीजन के अंतर्गत फरीदाबाद और पवलवल आते हैं. लेकिन यहां भी प्रति 100 पात्र लड़कियों पर केवल 27.7 एसएसवाई खाते खुलवाए गए हैं. वहीं, डाकघर के रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश भर में 0 से 10 वर्षीय बच्चियों की संख्या सितंबर 2026 तक करीब 24,02,970 है. लेकिन इनमें से सुकन्या समृद्धि योजना के खातों की कुल संख्या केवल 10,31,083 है. इससे स्पष्ट है कि दस वर्ष बाद भी 13,71,887 का अंतर बना हुआ है.
