गुरुग्राम की पाॅश डीएलएफ काॅलोनियों में नियमों के विपरीत किए गए निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है।
अदालत ने कहा है कि किसी लाइसेंसशुदा काॅलोनी के नगर निगम की सीमा में शामिल हो जाने से नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग (डीटीसीपी) की वैधानिक शक्तियां समाप्त नहीं हो जातीं।
यानी डीएलएफ फेज-1 से 5 में भवन नियमों के उल्लंघन पर डीटीसीपी भी कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। इससे लंबे समय से चले आ रहे अधिकार क्षेत्र के विवाद का रास्ता साफ हुआ है।
मामला डीएलएफ फेज-1 से 5 में भवन निर्माण और संपत्तियों के उपयोग से संबंधित है। विभाग ने इन काॅलोनियों में व्यापक सर्वे कराया था। इसमें कुल 14 हजार 757 भूखंडों को शामिल किया गया। इनमें 11 हजार 8 सामान्य श्रेणी और 3,749 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के भूखंड बताए गए।
