करीब छह दशक से अटकी किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर अब बड़ा रास्ता साफ हो गया है। हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत छह राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल और परियोजना की लागत से जुड़े मतभेदों को दूर करने के बाद मंगलवार, 15 सितंबर को नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने की तैयारी है।
किसाऊ बांध हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। परियोजना का उद्देश्य सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने के साथ बिजली उत्पादन करना और यमुना में पानी के प्रवाह को बढ़ाना भी है।
हरियाणा को मिलेगा 836.39 क्यूसेक पानी
समझौते के तहत हरियाणा को सिंचाई के लिए करीब 836.39 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। इसके लिए राज्य को परियोजना में करीब 579 करोड़ रुपये का हिस्सा देना होगा। हरियाणा के लिए यह परियोजना खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे राज्य की सिंचाई जरूरतों को अतिरिक्त पानी मिल सकेगा।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश को करीब 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। यानी किसाऊ परियोजना का लाभ एक नहीं बल्कि कई राज्यों को मिलेगा।
छह राज्यों के बीच बनी सहमति
किसाऊ परियोजना में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान भागीदार राज्य हैं। परियोजना को लेकर मुख्य विवाद लागत के बंटवारे और पानी-बिजली से मिलने वाले लाभों को लेकर था।
जून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस पर सहमति बनी थी। तय व्यवस्था के अनुसार परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि छह राज्यों के बीच साझा की जाएगी।
हिमाचल पर नहीं पड़ेगा बड़ा वित्तीय बोझ
नई व्यवस्था में हिमाचल प्रदेश के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। हिमाचल की ओर से बिजली घटक की लागत को लेकर आपत्ति जताई गई थी। अब दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा हिमाचल के हिस्से के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। इसके बदले हिमाचल के हिस्से के पानी का आवंटन दिल्ली और राजस्थान को किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश को परियोजना से करीब 211 मेगावाट बिजली मिलने की बात सामने आई है। राज्य को इससे लंबे समय में लगभग 600 करोड़ रुपये सालाना का लाभ होने का अनुमान भी बताया गया है।
236 मीटर ऊंचा होगा बांध
किसाऊ परियोजना में करीब 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट बांध का निर्माण प्रस्तावित है। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होने और पेयजल एवं औद्योगिक जरूरतों के लिए भी पानी उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना की लागत अब करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
यमुना के लिए भी अहम है परियोजना
किसाऊ बांध को केवल राज्यों की पानी की जरूरत पूरी करने वाली परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इससे यमुना नदी में पानी का प्रवाह बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्र के अनुसार परियोजना से यमुना में साफ पानी का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे नदी के पुनर्जीवन की कोशिशों को भी गति मिल सकती है।
छह राज्यों के बीच MoU पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा। ऐसे में मंगलवार का समझौता करीब छह दशक से लंबित इस परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
