जापान में चल रहे एशियन गेम्स में किसान की बेटी रिटौली गांव की 20 वर्षीय तीरंदाज कीर्ति शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। पिता विजय के त्याग, खुद के समर्पण और कोच उधम सिंह के मार्गदर्शन से कीर्ति शर्मा ने महिला रिकर्व टीम के फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर एशियन गेम्स में इस स्पर्धा का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता।
यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण कोरिया की टीम लंबे समय से विश्व तीरंदाजी की शीर्ष टीमों में रही है। कीर्ति के पिता विजय शर्मा तीन एकड़ के किसान हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद बेटी के सपनों को आगे रखा और उसे खेलों में आगे बढ़ाया। बेटी कामयाब हो, इसके लिए कर्ज तक लिया और फसल बेचकर चुकाया।
कीर्ति ने 15 साल की उम्र में पिल्लूखेड़ा के एफएस कान्वेंट स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ते समय कोच उधम सिंह के कहने पर तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया। नया धनुष महंगा आता था, पिता ने उस समय स्कूल से पांच हजार रुपये में पुराना धनुष खरीद कर कीर्ति को दिया। साल 2022 में हजारीबाग पदमा साई झारखंड में चयन के दौरान नए धनुष की जरूरत थी।
