चंडीगढ़: देशभर के 22 राज्यों के करीब 4500 स्कूलों के बीच चंडीगढ़ के सेक्टर-16 डी स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाई है. एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2026-27 में स्कूल ने स्टेट गवर्मेंट डे स्कूल श्रेणी में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है. खास बात यह है कि स्कूल पहले भी 2023-24 के सर्वे में इस श्रेणी में नंबर-1 रह चुका है.
22 राज्यों के 4500 स्कूलों में नंबर-1: एजुकेशनवर्ल्ड की ओर से कराए गए सर्वे में 22 राज्यों के 34 शहरों के स्कूल शामिल किए गए. करीब 4500 स्कूलों के मूल्यांकन में केवल परीक्षा परिणामों को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि स्कूल के समग्र प्रदर्शन को परखा गया. अकादमिक प्रतिष्ठा, शिक्षकों की क्षमता, विद्यार्थियों पर व्यक्तिगत ध्यान, स्कूल नेतृत्व, प्रबंधन, पाठ्यक्रम, शिक्षण शैली और सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों समेत 14 मानकों पर स्कूलों का मूल्यांकन किया गया.
टॉप-10 में चंडीगढ़ के तीन स्कूल: इस रैंकिंग में चंडीगढ़ के तीन सरकारी स्कूलों ने टॉप-10 में जगह बनाई है. सेक्टर-16 डी का गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल पहले स्थान पर रहा. वहीं सेक्टर-35 का गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल नौवें और हाउसिंग बोर्ड/हाउसिंग कॉम्प्लेक्स क्षेत्र का सीनियर सेकेंडरी स्कूल दसवें स्थान पर रहा. इससे चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली है.
स्मार्ट एजुकेशन से अब 11वीं में AI की पढ़ाई: सेक्टर-16 स्कूल में पढ़ाई को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है. स्कूल में स्मार्ट एजुकेशन, डिजिटल बोर्ड और तकनीक आधारित शिक्षण का इस्तेमाल हो रहा है. इसी कड़ी में इस सत्र से 11वीं कक्षा में AI को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है. स्कूल का प्रयास है कि विद्यार्थी केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें, बल्कि भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए भी तैयार हों.
हर क्लासरूम में AC, डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई: स्कूल की खासियतों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है. स्कूल के सभी कमरों में AC की सुविधा है और विद्यार्थियों को डिजिटल बोर्ड के माध्यम से पढ़ाया जाता है. शिक्षकों का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से बच्चों के लिए विषयों को समझना अधिक आसान और रोचक हो रहा है. पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों की स्किल डेवलपमेंट पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
प्रिंसिपल बोलीं- “सामूहिक मेहनत का नतीजा”: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरानस्कूल की प्रिंसिपल सीमा रानी ने राष्ट्रीय रैंकिंग में पहला स्थान मिलने पर इसे पूरी टीम की उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि, “यह उपलब्धि स्कूल के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है. हमारा प्रयास है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाए.ठ
“वॉल ऑफ फेम” बनी विद्यार्थियों की प्रेरणा: स्कूल की एक और खास पहचान इसकी ‘वॉल ऑफ फेम’ है. इसमें स्कूल से पढ़कर निकले विद्यार्थियों की उपलब्धियों को जगह दी गई है. यह दीवार वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का काम करती है. स्कूल प्रबंधन का मानना है कि पुराने विद्यार्थियों की सफलता की कहानियां बच्चों को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करती हैं.
करिकुलम के साथ स्किल डेवलपमेंट पर जोर: शिक्षकों के अनुसार स्कूल में पढ़ाई के साथ करिकुलम आधारित गतिविधियों और विद्यार्थियों की स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है. बच्चों को विभिन्न गतिविधियों और अतिरिक्त कक्षाओं में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. स्कूल ने अपनी कई शैक्षणिक गतिविधियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया है, ताकि विद्यार्थी वीडियो के माध्यम से अपनी पढ़ाई को और बेहतर कर सकें.
पढ़ाई के साथ स्पोर्ट्स में भी आगे: स्कूल की उपलब्धियों का दायरा केवल अकादमिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है. विद्यार्थियों को खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में भी अवसर दिए जाते हैं. शिक्षकों के मुताबिक खेलों में विद्यार्थियों की भागीदारी से उनमें अनुशासन, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है. यही समग्र दृष्टिकोण स्कूल की राष्ट्रीय रैंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
“बच्चों को परीक्षा के लिए नहीं, भविष्य के लिए करते हैं तैयार”: स्कूल की शिक्षिका सरबजीत कौर ने कहा कि, “हमारा फोकस बच्चों को केवल परीक्षा के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है.” वहीं, शिक्षिका सुनिता कुमारी ने कहा कि, “डिजिटल माध्यम और स्मार्ट क्लासरूम बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी बनाते हैं. हमारे स्कूल की एक स्टूडेंट ने स्पोर्ट्स में गोल्ड भी हासिल किया है.” शिक्षक राजेन्द्र कुमार ने कहा कि, “बच्चों को पढ़ाई के साथ अलग-अलग गतिविधियों में आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं. यही उनकी प्रतिभा को निखारने में मदद करता है.” वहीं, लेक्चरर योगिता खन्ना ने कहा, “आज के समय में विद्यार्थियों को तकनीक के साथ जोड़ना जरूरी है. AI जैसी नई तकनीक की जानकारी उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती है.”
स्टूडेंट्स में खासा उत्साह: इसके साथ ही छात्र आयुष ने कहा कि, “स्कूल में पढ़ाई के साथ खेल और दूसरी गतिविधियों में हिस्सा लेने के मौके मिलते हैं. डिजिटल तरीके से पढ़ाई करना भी काफी मददगार है.” वहीं, छात्रा जयंती शर्मा ने कहा कि, “वॉल ऑफ फेम और स्कूल की उपलब्धियां हमें भी बेहतर करने और अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करती हैं.”
29 श्रेणियों में हुआ स्कूलों का आकलन: एजुकेशन वर्ल्ड ने स्कूलों को मुख्य रूप से डे स्कूल, बोर्डिंग स्कूल और इंटरनेशनल स्कूल की श्रेणियों में रखा. इनके भीतर 23 सब-कैटेगरी और छह विशेष-सामाजिक सब-कैटेगरी के तहत कुल 29 श्रेणियों में मूल्यांकन किया गया.स्टेट गवर्मेंट डे स्कूल श्रेणी में सेक्टर-16 स्कूल का नंबर-1 रहना सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षा और समग्र विकास की संभावनाओं को भी सामने लाता है.
सरकारी स्कूलों के लिए बनी मिसाल: सेक्टर-16 स्कूल की लगातार राष्ट्रीय स्तर पर सफलता यह दिखाती है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक शिक्षण तकनीक, योग्य शिक्षक और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाए तो वे निजी स्कूलों को भी कड़ी चुनौती दे सकते हैं. AI की पढ़ाई, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल कंटेंट, खेल और ‘वॉल ऑफ फेम’ जैसी पहल ने स्कूल को एक अलग पहचान दी है
