रेलवे में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच अब और सख्ती से होगी।
रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलवे, उत्पादन इकाइयों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त निकायों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति के समय ही संबंधित प्रमाणपत्रों की समय पर और सही तरीके से जांच की जाए, ताकि अपात्र व्यक्ति आरक्षण का लाभ न ले सके।
इन दिशा-निर्देशों के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता की जांच महत्वपूर्ण है।
बोर्ड ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। रेलवे बोर्ड के निर्देश के मुताबिक अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रमाणपत्र की जांच नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ही की जानी चाहिए।
प्रमाणपत्र किस सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया है, उसकी वैधता और उसमें दर्ज दावे नियमों के अनुरूप हैं या नहीं, इसकी पुष्टि समय पर करने को कहा है। रेलवे में बड़ी संख्या में पदों पर नियुक्तियां होती हैं। आरक्षण का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे, इसके लिए प्रमाणपत्रों की जांच को महत्वपूर्ण माना गया है।
