चरखी दादरी: चरखी दादरी के गांव बौंद कलां निवासी युवा हॉकी खिलाड़ी जीतपाल ने संघर्ष, मेहनत और अटूट संकल्प के दम पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. दरअसल, जीतपाल ने चीन के मोकी में संपन्न जूनियर हॉकी एशिया कप के फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराकर छठी बार खिताब अपने नाम किया. भारतीय टीम की इस स्वर्णिम जीत में मिडफील्डर जीतपाल ने अहम भूमिका निभाई. गांव लौटने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया.
पिता ने दूध बेचकर उठाया खर्च: जीतपाल की सफलता के पीछे परिवार के वर्षों के त्याग और संघर्ष की कहानी है. उनके पिता जगजीत सिंह गांव में पंच होने के साथ किसान और पशुपालक हैं. उन्होंने कहा कि, “हमने दो-चार भैंसें पालकर दूध बेचा और उसी आमदनी से बेटे की पढ़ाई और खेल का खर्च उठाया. सुविधाएं कम थीं, लेकिन बेटे का हौसला कभी कम नहीं हुआ.”
मिट्टी की गलियों में दौड़कर शुरू किया सफर: गांव में न खेल मैदान था और न आधुनिक खेल सुविधाएं. इसके बावजूद जीतपाल ने मिट्टी की गलियों में दौड़ते हुए हॉकी का सफर शुरू किया. रॉयल इंटरनेशनल स्कूल में कोच महिपाल सिंह और सुनील परमार ने उनकी प्रतिभा को तराशा. लगातार अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें जिला स्तर से राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया.
“बेटे ने देश का नाम रोशन किया”: जीतपाल की उपलब्धि से उनकी मां कविता देवी भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा कि, “जीतपाल ने मेरा दूध लजाया नहीं, बल्कि देश और परिवार का नाम रोशन किया है. आज पूरे गांव और जिले के लिए गर्व का दिन है. मेरी युवाओं से नशे और गलत संगत से दूर रहकर खेल और मेहनत पर ध्यान देने की अपील है,”
जूनियर वर्ल्ड कप के बाद ओलंपिक पर नजर: गांव पहुंचने पर जीतपाल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, कोच, गुरुओं और पूरी टीम को दिया. उन्होंने कहा कि, “यह सिर्फ शुरुआत है. अब हमारा लक्ष्य जूनियर वर्ल्ड कप जीतना है. इसके बाद ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना मेरा सबसे बड़ा सपना है. आज हॉकी आधुनिक एस्ट्रोटर्फ पर खेली जाती है, लेकिन हमारे गांव में न रनिंग ट्रैक है और न हॉकी का मैदान. अगर बौंद कलां में एस्ट्रोटर्फ और सिंथेटिक ट्रैक बन जाए तो यहां से कई जीतपाल निकल सकते हैं.”
गांव को अब अपने चैंपियन पर नाज: जूनियर एशिया कप में भारतीय टीम की जीत के बाद जीतपाल की कहानी ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है. परिवार और ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनका यह सफर आगे भी जारी रहेगा और वह भविष्य में भारतीय हॉकी टीम के साथ बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे
