हरियाणा पुलिस ने यातायात नियमों की पालना, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नेक्स्ट जेन ई-चालान प्रणाली को प्रदेशभर में लागू कर दिया है. इस तकनीक आधारित व्यवस्था के तहत यातायात उल्लंघनों पर कार्रवाई न केवल अधिक पारदर्शी और डिजिटल होगी, बल्कि चालान जारी होने से लेकर उसके निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और जवाबदेह रहेगी.
हरियाणा पुलिस महानिदेशक ने की बैठक: इस संबंध में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों, पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की. डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तकनीक आधारित पुलिसिंग को जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों में बदला जाए और आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें.
नेक्स्ट जेन ई-चालान डिजिटल, समयबद्ध और जवाबदेह: बैठक में एडीजीपी विकास अरोड़ा ने प्रदेश में यातायात प्रबंधन और प्रवर्तन के जारी कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा 20 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुरूप हरियाणा में 16 जून 2026 से नेक्स्ट जेन ई-चालान प्रणाली लागू की गई है. नई व्यवस्था के तहत यातायात उल्लंघन के बाद तीन दिनों के भीतर नोटिस भेजा जाएगा और वाहन चालक को 45 दिनों के भीतर चालान स्वीकार करने या उसे चुनौती देने का अवसर मिलेगा. निर्धारित अवधि में कोई कार्रवाई नहीं करने पर चालान स्वतः स्वीकार माना जाएगा. यदि वाहन चालक चालान के विरुद्ध शिकायत दर्ज करता है तो उसका निस्तारण 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. निर्धारित अवधि में शिकायत का निस्तारण नहीं होने पर शिकायत स्वतः स्वीकार मानी जाएगी. हर जिले में एक नोडल अधिकारी और दो शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है.
चालान का भुगतान 90 दिनों में: शिकायत खारिज होने की स्थिति में वाहन चालक चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा कराकर न्यायालय में चुनौती दे सकता है. जबकि स्वीकार किए गए चालान का भुगतान 90 दिनों के भीतर करना होगा. इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167(12) के तहत लंबित चालान के निस्तारण तक संबंधित वाहन के पंजीकरण या चालक के लाइसेंस से जुड़े कार्यों पर रोक लगाई जा सकती है और वाहन को पोर्टल पर “Not to be Transacted” के रूप में चिह्नित किया जा सकता है. नियम 167(13) के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पुलिस अधिकारियों को मोटर वाहन हिरासत में लेने का भी अधिकार है. यह व्यवस्था यातायात प्रवर्तन को कागजी प्रक्रिया से निकालकर डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताई गई है.
बड़े पैमाने पर एनफोर्समेंट: बैठक में पुलिस अधीक्षक पुष्पा खत्री ने बताया कि हरियाणा पुलिस द्वारा वर्ष 2026 में यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है. इस दौरान बिना नंबर प्लेट के 1,40,851, लेन ड्राइविंग के 3,03,435, ड्रंकन ड्राइविंग के 37,332, गलत दिशा में वाहन चलाने के 2,68,360, बिना हेलमेट के 9,75,160, बिना PUC के 77,413 और ओवर-स्पीडिंग के 3,67,118 मामलों में कार्रवाई की गई. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हरियाणा पुलिस सड़क सुरक्षा को केवल प्रवर्तन का विषय न मानकर अनुशासित और सुरक्षित यातायात व्यवस्था के निर्माण के रूप में देख रही है. विशेष रूप से बिना हेलमेट, ओवर-स्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने और ड्रंकन ड्राइविंग जैसे गंभीर उल्लंघनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई पर जोर है.
